एक गरीब किसान, जिसका नाम रामू था, एक छोटे से गाँव में रहता था। उसके पास केवल एक बीघा ज़मीन थी, जिसे वो अपने बच्चों के भरण-पोषण के लिए सींचता था। रामू सुबह-सुबह उठता, अपनी चार संतानों को जगाता और फिर खेत में काम करने निकल जाता। उसकी फसलें हमेशा मौसम पर निर्भर थीं और इस बार बारिश की कमी ने उसकी मेहनत को बर्बाद कर दिया।
रामू ने सोचा कि उसे अपने बच्चों का बेहतर भविष्य देना है, इसलिए उसने दिन-रात मेहनत की। लेकिन जब फसलें खराब हो गईं, तो उसके पास खाने के लिए भी पैसे नहीं थे। एक दिन, उसकी पत्नी ने कहा कि उन्हें स्थानीय बाजार में अपनी एक बकरी बेचनी चाहिए। इसे सुनकर रामू को बहुत दुख हुआ, लेकिन उसने अपनी पत्नी की बात मानी और बकरी बेच दी।
बकरी की बिक्री से मिली राशि से उन्होंने कुछ अनाज खरीदा। रामू ने फिर से मेहनत शुरू की, आशा और संघर्ष का साथ नहीं छोड़ा। धीरे-धीरे उनके हालात सुधरने लगे। रामू जानता था कि मेहनत और उम्मीद से ही जीवन में कोई भी बाधा पार की जा सकती है।